हाँ भिया अपन तो इन्दोरी हैं

हाँ भिया अपन तो इन्दोरी हैं

हाँ भिया अपन तो इन्दोरी हैं

हाँ भिया अपन तो इन्दोरी हैं
सुबह का अखबार चाय की चुस्कियों के साथ ,
नाश्ते के लिए बोलो तो हो जाये पोहे संग जलेबी का साथ
हाँ भिया अपन तो इन्दोरी हैं

चाहे हो इम्तिहान की चिंता या फिर हो रिजल्ट की ख़ुशी
चाहे घर आई हो चमचमाती कार या फिर आँगन में खडी हो बाइक नयी ,
सारी खुशियों का एक ही ठिकाना ,
हाँ वही अपना खजराना
हाँ भिया अपन तो इन्दोरी

हैं स्वाद की तो बस पूछिये ही मत बात ,
चाहे हो सराफे की चाट , या फिर हो ५६ का hotdog
चाहे हो गर्मी को मात देती घमंडी लस्सी या
फिर हो गुरूद्वारे के पास की पानीपूरी
क्यों आ गया ना मुह में पानी , यही तो इंदौर की बात है
जानी घुमने जाना हो तो मेट्रो टैक्सी है , ज्यादा गर्मी है तो मोनिका galaxy है
दाल बाफले का जायका दिल खुश कर देगा ,
सर्दियों में गराद्दू बस यही मिलेगा हर खाने की लज्ज़त हो जाती है दुगनी ,
जब मिल जाती है उसमे यहाँ की सेंव और चटनी
दिल से देते हैं प्यार की दावतें ,
इसलिए हमेशा शान से कहते हैं
हाँ भिया अपन तो इन्दोरी हैं

लालबाग यहाँ की पहचान है , राजबाड़ा इंदौर की जान है ,
विजय बल्ला अपना अभिमान है ,
कांच का मंदिर इंदौर की शान है
गांधी हाल की घडी हमे आज भी समय की सीख सीखती है ,
टी.आई. की चमक हमारी प्रगति दिखाती है
अहिल्या की नगरी है , मप्र का गौरव , रहेगा हर पल इस पर गर्व
हाँ भिया अपन तो इन्दोरी हैं

हर कान ने सुन रखा है पाकीजा का नाम ,
हर आँख देख चुकी है "अभय प्रशाल " में गरबे की थाप ,
कभी न कभी हर किसी ने देखा होगा नेहरु स्टेडियम का कोई FUNCTION
कभी न कभी किसी को लगा होगा "MY" हॉस्पिटल का INJECTION
हर किसी ने सिटी बस में बैठकर शहर घुमा होगा ,
और नगर सेवा वालों का "मांगलिया" "मांगलिया" भी सुना होगा इसलिए कहते हैं की भिया अपन तो इन्दोरी हैं

मेरे दोस्त मेरे यारा ,
है दिल्ली दिलवालों का शहर और मुंबई एक चमकता सितारा ,
पर जो एक बार इंदौर में आकर जिंदगी के कुछ बिताता है ,
यहाँ का मौसम यहाँ की हवा यहाँ के लोग भूल नहीं पाता है ,
तो दिल से स्वागत है , आकर एक बार यहाँ जरुर देखिएगा ,
साड़ी खुशियाँ झोली भरकर ले जायेंगे , ये वादा है हमारा .
हाँ भिया अपन तो इन्दोरी हैं - Unknown

इंदौर पर कविता

शहरो में शहर मेरा इंदौर है
मध्यप्रदेश कि आर्थिक-ओघोगिक राजधानी सिरमौर है

मुंबई का बच्चा यह मनभावन चितचोर है
सदाबहार है मौसम यहाँ खुशहाली चहुऔर है

यहा हसीन-सुकून भरी शब्-ए-मालवा दिलचोर है
चहकते-चहचहाते पक्षियों कि यहाँ सुहानी भौर है

उमंग-उल्लास में डूबा शहर मस्ती में भाव विभोर है
वर्ष भर यहाँ जश्न-उत्सव त्योहारों का होता शोर है

गज़ब की रंगत-रौनक यहाँ लाजवाब लहर-हिलोर है
हिंदू-मुस्लिम-सिक्ख-ईसाई सब मिलजुल कर यहाँ रहते है

मनाते ईद दिवाली सरे त्यौहार खुशियो में सराबोर है
खाने-पीने के शौकीन यहाँ दिनभर चलते चाय कट के दौर है

पोहा जलेबी-समोसा कचोरी के यहाँ हर चौराहे पर ठिया ठोर है
राजवाडा-सराफा-छप्पन बाजार रात में होते है यहाँ गुलज़ार

लजीज-सुस्वाद मिलते व्यंजन यहाँ, नमकीन के मशहूर है
सिरपुर तालाब पर रहते बत्तख सारस आते है प्रवासी पक्षी ढेर है

पिप्लियापाला पिकनिक स्पॉट यहाँ नाचते मगन-मोर है
राजवाडा लालबाग छत्रिया यहाँ एतिहासिक धरोहर है

खजराना गणेश मंदिर, घंटाघर, कांच मंदिर यहाँ नायाब बेजोड है
उज्जेन नगरी महाकालेश्वर-ओंकारेश्वर-महेश्वर यहाँ तीर्थ धाम है

मांडव का किला यहा रमणीय दर्शनीय मनोहर है
सावन की यहाँ हरियाली-निराली बरसाती यहा घनघोर है

मालवा की धरती यहाँ पग-पग नीर पग-पग रोटी कोर है
जो यहाँ आता, यहाँ का हो जाता लोटकर नहीं जाता

मिलता यहाँ चैन-सुकून, रहता है या मस्ती का सुरूर, ऐसा इंदौर है
यारबाज है लोग यहा के, मेहमाननवाजी-अतिथि सत्कार यहा भरपूर है

मकबूल फ़िदा हुसैन, स्वर कोकिला लता मंगेशकर का शहर यह
महान साहित्यकारों-संगीतज्ञो की भूमि यहाँ, यहाँ के महान गायक किशोर है
ऐसा अजब-गजब शहरो में शहर मेरा इंदौर है – महेंद्र कुमार सिरोठिया

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